8th Commission Passed – भारत सरकार ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी प्रतीक्षा देश के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारी वर्षों से कर रहे थे। केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी है, जो देश के लगभग 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों के जीवन को सीधे प्रभावित करेगा। यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह लाखों परिवारों की खुशहाली का भी आधार बनेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक फैसले को स्वीकृति प्रदान की। अक्टूबर 2025 में कैबिनेट ने आयोग के कार्यक्षेत्र यानी टर्म्स ऑफ रेफरेंस को भी पारित कर दिया, जिससे आयोग के काम की रूपरेखा स्पष्ट हो गई। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, विभिन्न भत्तों और पेंशन में सुधार के लिए ठोस सिफारिशें तैयार करना है।
आयोग का नेतृत्व और ढांचा
8वें वेतन आयोग की कमान सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में सौंपी गई है, जो अपने दीर्घ न्यायिक अनुभव के लिए जानी जाती हैं। उनके साथ आईआईएम बैंगलोर के प्रतिष्ठित प्रोफेसर पुलक घोष को अंशकालिक सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव पंकज जैन को आयोग का सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है, जो प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करेंगे। यह तीनों मिलकर एक सुदृढ़ और अनुभवी दल का निर्माण करते हैं, जिससे आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
रिपोर्ट कब तक आएगी?
आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का कार्यकाल दिया गया है। इस हिसाब से आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2027 के मध्य तक सरकार को सौंपे जाने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिसमें करीब तीन से छह महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है। इस गणना के अनुसार नई संशोधित वेतन संरचना संभवतः 2027 के अंत तक या 2028 के शुरुआती महीनों में प्रभावी हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर: सैलरी की असली कुंजी
फिटमेंट फैक्टर वह निर्णायक गुणांक होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की गणना की जाती है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था, जिसके परिणामस्वरूप न्यूनतम मूल वेतन 7,440 रुपये से उछलकर 18,000 रुपये हो गया था। 8वें वेतन आयोग के संदर्भ में विशेषज्ञ मानते हैं कि न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 रह सकता है, क्योंकि इस बार महंगाई भत्ता पहले से ही 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। लेकिन कोविड महामारी के दौरान डीए को फ्रीज रखे जाने और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए वास्तविक फैक्टर 2.0 या उससे ऊपर जाने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है।
कुछ आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.86 से लेकर 3.0 के बीच भी हो सकता है, जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत होगी। कर्मचारी संगठन भी इस मामले में आक्रामक रुख अपना रहे हैं और फेडरेशन ऑफ नेशनल पेंशनर्स ऑर्गेनाइजेशन ने 3.0 से 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग आयोग के सामने रखी है। यह मांग यदि पूरी होती है, तो कर्मचारियों को अभूतपूर्व वेतन वृद्धि का लाभ मिल सकता है।
संभावित वेतन वृद्धि का चित्र
यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहता है तो लेवल-1 के कर्मचारी का मूल वेतन 18,000 से बढ़कर लगभग 46,260 रुपये हो जाएगा और उनकी कुल अनुमानित ग्रॉस सैलरी 60,000 रुपये से भी अधिक हो सकती है। यदि फैक्टर 3.0 तक पहुंचता है तो यही न्यूनतम वेतन 54,000 रुपये हो जाएगा और ग्रॉस सैलरी 70,000 रुपये को पार कर सकती है। 3.25 के फैक्टर पर न्यूनतम बेसिक वेतन 58,500 रुपये और ग्रॉस सैलरी 75,000 रुपये से ऊपर जा सकती है। वरिष्ठ स्तरों पर जैसे लेवल-10 और लेवल-18 पर वेतन क्रमशः 7.83 लाख और 7.5 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
एरियर से मिलेगी बड़ी राशि एकमुश्त
8वें वेतन आयोग की सबसे सुखद बात यह है कि इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव यानी रेट्रोस्पेक्टिव रूप से लागू मानी जाएंगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि जितने भी महीनों में आयोग की रिपोर्ट लागू होने में देरी होगी, उतने महीनों का बकाया वेतन एकमुश्त एरियर के रूप में मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मासिक सैलरी में 5,000 रुपये की वृद्धि होती है और यह 15 महीने बाद लागू होती है, तो उसे 75,000 रुपये का एरियर एक बार में मिलेगा। आर्थिक शोध संस्था ICRA के आकलन के मुताबिक लेवल-1 से लेकर लेवल-5 तक के कर्मचारियों को 15 से 18 महीने के एरियर के रूप में तीन लाख से नौ लाख रुपये तक की राशि प्राप्त हो सकती है।
पेंशनधारियों के लिए भी नई सुबह
केवल नौकरीपेशा कर्मचारी ही नहीं, बल्कि देश के 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए भी यह आयोग एक नई आशा की किरण लेकर आया है। पेंशन पर भी वही फिटमेंट फैक्टर लागू होगा जो सक्रिय कर्मचारियों पर लागू किया जाएगा, जिससे पेंशनधारी भी समान रूप से लाभान्वित होंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि न्यूनतम पेंशन राशि 9,000 रुपये से बढ़कर 20,500 से 27,000 रुपये के बीच हो सकती है। यह बढ़ोतरी उन बुजुर्गों के लिए जीवन रक्षक साबित होगी जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पेंशन पर ही निर्भर हैं।
डीए मर्ज पर अफवाहों का सच
सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैली कि सरकार महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिला देगी, जिससे कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। वित्त मंत्रालय ने इस अफवाह को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल डीए को बेसिक सैलरी में समाहित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। डीए हर छह महीने में पूर्व की भांति बढ़ता रहेगा और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद उसे उचित रूप से नई संरचना में समायोजित किया जाएगा। इस स्पष्टीकरण से कर्मचारियों को राहत मिली है।
25 फरवरी की बैठक होगी अहम
कर्मचारी संगठनों की एक महत्वपूर्ण ड्राफ्टिंग समिति 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में एकत्रित होने वाली है, जिसमें वेतन आयोग को सौंपे जाने वाले मांग पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में फिटमेंट फैक्टर, घर किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाओं के संबंध में एकजुट मांगें तय की जाएंगी। सभी कर्मचारी संगठन इस बैठक को अत्यंत निर्णायक मान रहे हैं क्योंकि यहीं से उनकी आधिकारिक मांगों की रूपरेखा तय होगी।
8वां वेतन आयोग एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत है जो करोड़ों सरकारी परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की क्षमता रखता है। यद्यपि नई वेतन संरचना लागू होने में अभी समय है, किंतु जनवरी 2026 से एरियर मिलना निश्चित है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों को उतना ही बड़ा लाभ मिलेगा। देश के सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों की दृष्टि अब 25 फरवरी की बैठक और उसके पश्चात आयोग की आगामी गतिविधियों पर केंद्रित है।


